अपील से पहले 50% जमा जरूरी? जानें कोर्ट ने क्या कहा
क्या बिना 50% जमा अपील खत्म? जानें कोर्ट का बड़ा फैसला | Nasir vs Anupam Vijay 2026
अनुच्छेद 227 के अंतर्गत दायर वाद संख्या 2913/2026, मोहम्मद नासिर उर्फ नासिर अहमद बनाम अनुपम विजय उर्फ अनुपम विजय गुप्ता, में माननीय डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति द्वारा पारित यह निर्णय उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 की धारा 35(1) के अंतर्गत अपील दाखिल करने से पूर्व 50 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट की अनिवार्यता, उसकी विधिक प्रकृति तथा प्रक्रियात्मक अस्पष्टता की स्थिति में न्यायालय की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों पर प्रकाश डालता है;
मामले के तथ्य (Facts of the Case):
इस प्रकरण में याचिकाकर्ता एक किरायेदार था जिसके विरुद्ध मकान मालिक द्वारा धारा 21(2) एवं 23 के अंतर्गत कार्यवाही प्रारंभ की गई और दिनांक 07.08.2025 को किराया प्राधिकरण द्वारा बेदखली एवं बकाया भुगतान का आदेश पारित किया गया, जिसके विरुद्ध याचिकाकर्ता ने 08.09.2025 को अपील दायर की किन्तु उसने आवश्यक 50 प्रतिशत राशि का पूर्व-जमा नहीं किया तथा लगभग 90 दिन की देरी से 07.11.2025 को जमा करने का प्रयास किया जिसे 13.11.2025 को अस्वीकार कर दिया गया।
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याचिकाकर्ता के तर्क (Petitioner’s Arguments):
याचिकाकर्ता की ओर से यह कहा गया कि अंतिम आदेश पारित होने के पश्चात किराया प्राधिकरण functus officio हो चुका था और उसे बाद के आवेदन पर विचार करने का अधिकार नहीं था, साथ ही अधिनियम में पूर्व-जमा के लिए कोई स्पष्ट मंच निर्धारित नहीं है इसलिए प्रक्रियात्मक अस्पष्टता के कारण अपील के अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।
प्रतिवादी के तर्क (Respondent’s Arguments):
प्रतिवादी ने यह तर्क दिया कि धारा 35(1) के परंतुक में प्रयुक्त “कोई अपील नहीं की जा सकती” शब्दावली यह स्पष्ट करती है कि 50 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट अपील की अनिवार्य शर्त है और इसके अभाव में अपील का अस्तित्व ही नहीं है, साथ ही याचिकाकर्ता ने न तो समय सीमा के भीतर जमा किया और न ही विलंब क्षमा मांगी।
न्यायालय ने कहा (Court’s Observation on Law):
न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि “कोई अपील नहीं की जा सकती” का अर्थ यह है कि जब तक निर्धारित 50 प्रतिशत राशि जमा नहीं की जाती तब तक अपील विधि की दृष्टि में अस्तित्व में ही नहीं आती, अतः यह शर्त केवल प्रक्रियात्मक नहीं बल्कि अधिकार क्षेत्र (jurisdictional) से संबंधित है और इसका पालन अनिवार्य है।
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functus officio पर न्यायालय का दृष्टिकोण:
न्यायालय ने यह भी कहा कि किराया प्राधिकरण functus officio नहीं हुआ क्योंकि उसने अपने मूल आदेश में कोई परिवर्तन नहीं किया बल्कि केवल बाद के आवेदन को अस्वीकार किया, अतः उसके अधिकार क्षेत्र पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
लिमिटेशन और प्री-डिपॉजिट पर न्यायालय का विश्लेषण:
न्यायालय ने यह स्थापित किया कि अपील की वैधता के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं—पहली, अपील निर्धारित समय सीमा के भीतर दायर हो और दूसरी, 50 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट किया जाए, और दोनों शर्तें संचयी हैं, अर्थात एक के अभाव में दूसरी से पूर्ति नहीं हो सकती।
देरी (Delay) पर न्यायालय ने कहा:
न्यायालय ने कहा कि 90 दिन बाद किया गया जमा प्रयास विधिक रूप से स्वीकार्य नहीं है और बिना विलंब क्षमा के ऐसी अपील को वैध नहीं माना जा सकता।
प्रक्रियात्मक अस्पष्टता (Procedural Gap) पर न्यायालय ने कहा:
न्यायालय ने यह माना कि अधिनियम में जमा के मंच के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं है, किन्तु यह केवल प्रक्रियात्मक कमी है और इससे मूल वैधानिक शर्त को समाप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि न्यायालय अपने पर्यवेक्षी अधिकार का प्रयोग कर प्रक्रिया को स्पष्ट कर सकता है।
न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देश (Guidelines):
न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि अपीलकर्ता या तो अपील के साथ किराया न्यायाधिकरण में राशि जमा कर सकता है या किराया प्राधिकरण के समक्ष जमा कर उसकी रसीद प्रस्तुत कर सकता है, तथा आवश्यक होने पर न्यायाधिकरण अनुपालन के लिए समय भी दे सकता है।
न्यायालय का अंतिम निष्कर्ष (Final Finding):
न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता द्वारा न तो समय सीमा के भीतर प्री-डिपॉजिट किया गया और न ही विलंब क्षमा मांगी गई, अतः उसकी अपील प्रारंभ से ही अमान्य थी और बाद में किया गया जमा प्रयास उसे वैध नहीं बना सकता।
अंतिम निर्णय (Final Judgment):
फलस्वरूप न्यायालय ने यह कहा कि विवादित आदेश में कोई त्रुटि नहीं है और अनुच्छेद 227 के अंतर्गत हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता, इसलिए याचिका खारिज कर दी गई, और इस प्रकार यह निर्णय यह स्थापित करता है कि जहां विधायिका ने अपील के अधिकार को किसी अनिवार्य शर्त के अधीन रखा है वहां उसका कड़ाई से पालन किया जाना आवश्यक है और न्यायालय केवल प्रक्रियात्मक स्पष्टता प्रदान कर सकता है, मूल शर्त को शिथिल नहीं कर सकता।

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